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डोनाल्ड जॉन ट्रम्प आपकी ही पैदाइश है तो अब भुगतना भी आपको ही पड़ेगा

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9/11 वर्ल्ड ट्रेड हमले के बाद पूरी दुनिया ने मजहबी उन्माद की भयावहता को देखा. लगभग उसी समय ब्रिटेन समेत यूरोप के कई मुल्कों में अमेरिका की ही तरह कई आतंकी हमले हुए. ये वही दौर था जब पूरी दुनिया ने आतंकवाद और इस्लाम को एक-दूसरे का पर्याय मानना शुरू कर दिया था. इस खौफ के नतीजे में गैर-मुस्लिमों द्वारा कुरान शरीफ, इस्लाम और मुस्लिम मानसिकता को समझने का दौर शुरू हुआ. क्रूसेड के समय से आज तक लगातार कोशिश करके ईसाईयत ने इस्लाम को ऐसे मजहब के रूप में पेश करने में सफलता पा ली थी जो सिवाय तलवार किसी और रास्ते पर विश्वास ही नहीं रखता और न ही अपने अलावा किसी और मजहब या मत को मानने वाले को बर्दाश्त कर सकता है. ईसाईयत द्वारा स्थापित इस तथ्य को जेहन में लेकर जब वहां का एक ईसाई इस्लाम का अध्ययन करने गया तो उस ईसाई मानस ने इस्लाम को ठीक वैसा ही पाया जैसा चर्च ने उनको आज तक बताया था. ऊपर से जाकिर नाइक जैसे उन्मादी मजहबी प्रचारकों ने लगातार पश्चिमी लोगों को धमकाते हुए ये कुरानी भविष्यवाणी सुनाई कि one day islam will dominate the world. बराक "हुसैन" ओबामा राष्ट्रपति थे , इसलिये अमेरिकी 'क…

गरीब का बेटा ही ज़िहाद क्यों करे? कश्मीरी Separatist Leaders का कच्चा चिट्ठा

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अलगाववाद दिखाने को है साहेब.. परदे के पीछे धंधा है .. और धंधे में सब जायज है.
आम कश्मीरियों का भविष्य अन्धकार में धकेलने वाले ये तथाकथित #separatist Leaders न खुद कभी आगे आयेंगे न ही अपने बच्चों को भेजेंगे. कभी आसिया ऑद्रीबी की बेटी दिखी आन्दोलन में या गिलानी का बेटा नजर आया आपको? नहीं न . ये इंसानी लाशों को तलाशने वाले गिद्ध केवल आम युवा #Kashmiris को आगे भेजेंगे #CannonFodder बनने के लिए. कारण साफ है ... युवा भावनात्मक होता है .. उनको इतना भड़काना बहुत आसान है कि #IndianArmy / #CRPF को आत्मरक्षा में गोली चलाने पर मजबूर होना पड़े और जब ऐसा होगा तो एक दो तो युवा कश्मीरी मारे जायेंगे जो अागे चलकर चारे की तरह #Army & #India को #villain दिखाकर और युवाओं को भड़काने के लिए काम आयेंगे. इसी तरह ये #AzadiCircus चलता रहेगा और #Kashmir की बर्बादी की इबारत लिखी जाती रहेगी और भारत सरकार से मिलने वाली खैरात से इनकी जेबें भरती रहेंगी.. और भारत की छवि खराब करने के लिए जो #Pakistan / #ISI से जो मिलता है वो तो है ही . .


साहेब क्या करें .. गंदा है पर धंधा है.. और मां कहती थी.. कोई भी धंधा छोटा न…

भारत के मुसलमानों की नरेन्द्र मोदी के प्रति बदलती सोच

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ये अभी सिर्फ दो दिन पहले की घटना है...कानपुर लखनऊ हाइवे पर एक इंडस्ट्रियल एरिया है...आटा बंथर... चमड़े का सारी बड़ी कंपनियां यहीं बनी हुई हैं...वहीं पास में दो बुजुर्ग मुस्लिम दंपत्ति एक छोटी सी मल्टीपरपज दुकान चलातें हैं...चाय सिगरेट, पान मसाला, समोसा पकौड़ी, अंडा ऑमलेट, मैगी, पेन पेन्सिल सब मिलता है...शाम को मैगी खाने वालों की अच्छी खासी भीड़ होती है...उन बूढ़े बाबा अम्मा को देखकर प्रेमचंद की कहानियों के मुस्लिम पात्रों की याद आती है...जिनका इस्लाम अरबी नहीं बल्कि ठेठ देहाती देसी होता था....जो खुद को सिर्फ एक सामान्य गरीब नागरिक समझता था..

तालीम के नाम पर सिर्फ झुर्रियों में छुपा अनुभव और कपड़े के नाम पर सस्ता भारतीय परिधान...जो कभी पजामा भी हो सकता है और धोती भी...

उन्ही की दुकान पर दोस्तों के साथ शाम के वक्त अड्डेबाजी चल रही थी.....दुकान पर पुराने जमाने की छोटी वाली ब्लैक एंड व्हाईट टीवी पर मोदी जी का भाषण चल रहा था...तभी वो बूढ़े बाबा चाय छानते हुये ठेठ कनपुरिया में बोले....मोदी जईस नेता कबहूँ ना आवा... बाबू साहेब लोग गरीबन का खून चूस जितना जमा किये चरबियाये रहे थे...सब एकै बार में छंट…

आक्रमण के हथियार बदल गये हैं- भाग 1

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आपने एमआईबी (मेन इन ब्लेक) देखी थी??
यह उन फिल्मो में से है जिसे मैं ने सिनेमा हाल जाकर देखी थी।फिर सीडी,डीवीडी,पेन ड्राइव का जमाना बदलता गया।अपने में बहुत नये कलेवर में आया था।

...2 जुलाई 1997 को Barry Sonnenfeld द्वारा निर्देशित इस सीरीज की पहली फिल्म आई थी।एलियंस के हमलो और साजिशों पर बनी इस फिल्म ने दुनिया भर मे तहलका मचा दिया था।विल स्मिथ और टामी ली जोन्स दुनिया भर के दर्शको के चहेते सुपर स्टार हैं।लावेल कनिंघम के उपन्यास पर बेस्ड इस फिल्म ने उस समय के हिट टाइटेनिक की बराबरी की थी।फिल्म इतना चली की 2002 मे सेकंड पार्ट,2012 मे तीसरा पार्ट बनाना पड़ा था।
कहानी कोई खास नही है।विल स्मिथ और टामी ली जोन्स एक सीक्रेट एजेंसी मे है जो एलियन्स के ऊपर नजर रखते हैं।एलियन्स कभी आदमी का,कभी कीड़े या जानवर का रूप ले-ले,वेश बदल-बदल कर हमारी दुनिया के खिलाफ साजिश कर रहे...हीरो-हीरोइन उनके खिलाफ लड़ कर उन योजनाए विफल कर देते हैं। इस फिल्म मे गज़ब बात यह दर्शाया गया है की दुनिया मे रह रहे या जन-साधारणों को इन सब घटनाओ की जानकारी मे नही हैं।यही इस फिल्म की खासियत भी है।उसे मेकप,निर्देशन और स्कोरर पर ती…

कश्मीरी जिहादियों की बर्बरता और देशद्रोही पत्रकारों का भारत विरोधी रवैया

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सबसे पहले आप ये वीडियो देखिये.. इस वीडियो में सबसे आगे सेना की एम्बुलेंस जा रही है जिसमे हंदवारा में हुई मुठभेड़ में गम्भीर रूप से घायल मेजर सतीश सतीश दाहिया को अस्पताल ले जाया जा रहा है। एम्बुलेंस की सुरक्षा के लिए पीछे सेना की दो गाड़ियांं और चल रही हैं.. जैसे ही ये  किसी बस्ती से गुजरती हैं, स्थानीय कश्मीरियों द्वारा इसका रास्ता रोकने की पूरी कोशिश की जाती है..  हर जगह इन पर पथराव किया जाता है.. ताकि समय पर घायलों को अस्पताल पहुंचने से रोका जा सके। सेना को स्थानीय लोगों पर गोली चलाने या कोई भी कारवाई करने का आदेश नहीं है। 

अन्त में इसका परिणाम यह होता है कि मेजर दाहिया समय पर इलाज न मिलने के कारण वो इस दुनिया से चले जाते हैं। उनकी पत्नी शादी के तीन साल बाद ही विधवा हो जाती है। उनकी छोटी सी बेटी के सिर से पिता का साया हट जाता है।




 क्या मानवाधिकार का सारा ठीकरा सेना ने ले रखा है? इन क्रूर कश्मीरी जिहादियों का एक एम्बुलेंस पर पथराव  करने में तनिक भी मन नहीं डोला। क्या ये क्रूरता की पराकाष्ठा नहीं है? एक तरफ सेना पर पथराव करते हैं, दूसरी ओर मानवाधिकार का रोना रोते हैं और तो और कुछ दे…

"Taimur Ali Khan" नाम केवल नाम नहीं होते, नामों में बहुत कुछ रखा होता है

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कुछ लोग करीना कपूर और सैफ अली खान के नवजात बेटे का नाम तैमूर अली खान रखने पर उनका बचाव करते नजर आते हैं कि नाम में क्या रखा है? ये उनका निजी मामला है?

आपको याद दिला दें कि साल 2008-09 में "गजिनी" और "थ्री इडियट्स" जैसी फ़िल्मों से अधिकृत रूप से शाहरुख़ ख़ान के सुपरस्टारडम को ओवरटेक करने के दौरान जब आमिर ख़ान को वास्तविक "किंग ख़ान" कहा जाने लगा था, तब आमिर ने एक चर्चित ब्लॉग लिखा था, जिसमें सभी को चौंकाते हुए उन्होंने कहा था कि उनके पालतू कुत्ते का नाम "शाहरुख़" है!

किसको क्रेडिट दें ब्रेग्जिट को या भारत की आर्थिक नीति को जिसने भारत की अर्थव्यवस्था को ब्रिटेन से आगे कर दिया ।

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150 साल बाद ऐसा हुआ है कि भारत की अर्थव्यवस्था ने ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ा है ।
भारत विश्व का दूसरी सबसे बड़ी जनसँख्या वाला देश है परन्तु टैक्स सिर्फ तीन प्रतिशत लोग ही देते हैं
उसके बाद भी जिस तेजी से भारत की जी डी पी बढ़ रही है वो अपने आप में एक मिसाल है
फरवरी 2016 में ही भारत ने चीन को पीछे छोड़ा था.......अब ब्रिटेन को
जीडीपी के आधार पर विश्व का छठा सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का अनुमान भी है कि 2017 में भारत की जीडीपी 7.6 प्रतिशत तक हो जाएगी
पर सरकार का निश्चय इसे डबल डिजिट में पहुँचाने का है ।
मनमोहन सिंह तो बोल गए कि जीडीपी दो प्रतिशत कम हो जाएगी पर उनकी सुनता कौन है इसलिए जीडीपी कुछ समय के लिए आधा से पौन प्रतिशत तक डाउन होगा
फिर भी मुद्रास्फीति को कम रखने और ग्लोबल कमोडिटीज की कीमत में मंदी ने भारत की राह आसान कर दी है
मोदी सरकार ने आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए व्यापक बाजार सुधारों को प्रेरित किया
उधर ब्रिटेन ब्रेग्जिट से निकल गया और उसकी इकॉनोमी एवं करेंसी दोनों संकट से जूझने लगे
आने वाले सालों में फ्राँस और जर्मनी …

क्या मोदी सरकार की नोटबंदी विफल रही?

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14 लाख करोड़ के नकदी अर्थव्यवस्था में 11 लाख करोड़ बैंक खातों में आ चुके हैं, अनुमान है कि आगे भी और आ जाएंगे| तो इससे क्या निष्कर्ष निकालें- नोट बंदी विफल रहा ? 22 करोड़ अकेले जनधन अकाउंट हैं, 2.5 लाख के हिसाब से अकेला यही 55 लाख करोड़ खपाने में सक्षम हैं, यानि 14 लाख करोड़ का भी 4 गुना , उसमें महिलाओं का बैंक अकाउंट अलग है| यानि ऐसे देश में जहाँ हर घर में भगत सिंह जन्मे लेकिन मेरा घर छोड़ के टाइप वाला देशप्रेम हो ,तो यहाँ ऐसा होना एबनॉर्मल नहीं है|


RBI के observe, orient, decide, and act (OODA) की नीति से स्पष्ट हो चुका है कि असल प्लानिंग तो अब शुरू हुई है| उसके पहले कि सबसे बड़ी प्लानिंग यही दिखाई पड़ती है कि कोई प्लानिंग नहीं ! पहले भले असंभव रहा हो लेकिन अब के आकड़े ये बता सकते हैं कि कितना नोट छापना है, कितना कैशलेश होना है| जैसे रोज रोज नए नियम आ रहे हैं, कल RBI गाइडलाइन जारी कर डालेगी कि बस इससे ज्यादा नोट मार्केट में नहीं आने हैं , बाकी के जमा राशि का इस्तेमाल केवल और केवल प्लास्टिक मनी या चेक आदि के द्वारा ही संभव है तोदूसरे के अकाउंट का इस्तेमाल करके काले को सफ़ेद करने के अरमानों पे…