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Quartered into snow; silent to remain,
When the bugle calls; They shall rise and march again.

Sunday, 30 October 2016

#Sandesh2Soldiers -हमारे वीर जवानों को दीपावली की शुभकामनायें

भारतीय सेना को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें 



ज्ञानवाणी की ओर से सभी भारतीयों और भारतीय सेना तथा सभी सैनिकों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें हमारे वीर जवानों के लिए .. हमारा विशेष दीपावली सन्देश , Jai Hind


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Saturday, 8 October 2016

GM बीज, कृषि की बर्बादी और हमारी मौत की तैयारी, आखिर क्यों? Say no to GMO

पिछले दशक यानि 2001 से 2010 के बीच में आंध्र-प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक में कुल एक लाख के आस पास किसानों ने आत्महत्या कर ली ,आज भी कर रहे हैं। कारण- वे GM (जेनेटिकली मोडीफाइड) BT-Cotton उगा रहे थे, जिसकी लागत बहुत ज्यादा थी लेकिन मुनाफा कौड़ी के भाव था, यहाँ तक की किसानों ने घाटे में भी अपने माल बेचा जिस कारण कर्ज में आ गए और जिंदगी बर्बाद हो गई है और आत्महत्या कर बैठे।



क्या हैं ये जीएम बीज?
ये बीज प्रयोगशाला में सामान्य बीजों की जीन में जेनेटिक इंजीनियरिंग के माध्यम से परिवर्तन करके कृत्रिम रूप से तैयार किये जाते हैं। इन बीजों में कोई विशेष गुण डाला जाता है तथा इन बीजों को सिर्फ एक बार उपयोग किया जा सकता है अर्थात् आप अपनी फसल के बीज दुबारा नहीं उपयोग कर सकते।

GM बीजों के लिए कंपनियों पर निर्भरता और कंपनियों की मनमानी
इन जीएम बीजो की लागत ज्यादा होने का कारण यह था कि GM BT-Cotton के बीज के लिए किसानों को कंपनियों पे ही निर्भर होना है । ये बीज प्रयोगशाला में बनाये जाते हैं तथा किसान इस बीज का संरक्षण कर नहीं सकता जैसे पारंपरिक खेती में अब तक करता आया था, क्योंकि BT-Cotton कि संरक्षित बीज किसी काम कि नहीं है। ये बीज उन्हें निश्चित कम्पनियों से ही खरीदने पड़ते हैं और ये कंपनियाँ जब चाहे दाम बढ़ा देती हैं। किसान चाहकर भी अब पुरानी कपास पर नहीं लौट सकते क्योंकि इसका बीज अब बाजार में उपलब्ध ही नहीं है।

GM बीजों से मृदा की उर्वरा क्षमता की हानि
भारत सरकार की ही एजेंसियाँ बता रही हैं कि समय के साथ ये बीज धरती की उर्वरा क्षमता भी डाउन कर डालते हैं जिससे उत्पादन भी कम हो जाता है। किसान पे बढ़े हुए लागत और कम उत्पादन का डबल अत्याचार होता है। एक खेत में तीन चार साल लगातार जीएम फसल उगाने के बाद उस खेत की उर्वरा क्षमता काफी प्रभावित होती हैं क्योंकि ये जीएम फसलें बहुत तेजी से मृदा से पोषक तत्व, भूमिगत जल तथा अन्य कार्बनिक पदार्थों को सोखकर उसको सामान्य फसलों के लिए बेकार कर देती हैं जिससे अधिक उर्वरकों का प्रयोग करना पड़ता है, परिणाम, अधिक लागत और ऊर्वरकों पर निर्भरता।

इतने हानिकारक प्रभावों के बाद भी भारत सरकार द्वारा GM फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे भविष्य में किसानों की आत्महत्या करवाने की नींव डाली जा रही है
जब सरकार कि ही एजेंसियाँ ऐसा मान रही हैं कि BT-Cotton किसानों के हित में नहीं हैं, इससे केवल GM बीज बनाने वाली कंपनियों का फायदा है तो इससे बड़ा दोगलापन क्या होगा कि भारत सरकार कि ही एजेंसियों ने अब Genetically Modified Mustard यानि GM सरसों को बाजार में रिलीज करने की अनुमति दे डाली। जिससे किसानों में ही भारी आक्रोश है क्योंकि कुछ मूर्ख किसान तो ऐसे होंगे ही जो पहले कुछ साल इस बीज के द्वारा मार्केट कैप्चर करेंगे और प्रकृतिक बीजों पे निर्भर किसान मार्केट से बाहर होगा और सारे किसान सरकार के इस फैसले GM सरसों उगाने को मजबूर होंगे और BT-कॉटन उगाने वाले किसानों की तरह ही अगले कुछ दशकों में अत्महत्या करेंगे।

किसानों का भारी विरोध और सुप्रीम कोर्ट का स्टे
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने भारी विरोध के बाद इसके रिलीज पे स्टे लगा दिया है, बिहार के नितीश सरकार ने मोदी सरकार से अपील कि है कि ऐसे आत्मघाती निर्णय पे हस्तक्षेप करें। नितीश कुमार का कहना है कि पहले इन कंपनियों ने बाजार में किसानों को साठने का प्रयास किया लेकिन जब किसान नहीं माने तो भारत सरकार कि एजेंसियों को मनाने पहुँच गयी और वो मान गईं, जिसके बाद से विरोध के स्वर बुलंद है।

क्या हम अपने भविष्य को जान बूझकर अंधकार में धकेल रहे हैं ?
ध्यान देने कि बात है कि ये सिर्फ किसानों का मसला नहीं है, यदि ऐसे ही सब कुछ चला और एक दिन किसान सभी प्रकार के भोज्य पदार्थ के लिए GM बीजों पे निर्भर हो गया तो ये कंपनियाँ तय करेंगी कि दाल, चावल, गेंहू, सब्जी ,तेल के दाम क्या होंगे। कम से कम आज भारत खाने के मामले में स्वदेशी है , विदेशों से भीख नहीं माँगना पड़ता। लेकिन तब क्या होगा जब भोजन के लिए भिखारी हो जाएंगे, आपके तनख्वा का कुल हिस्सा आपके भोजन पानी पे व्यय होगा। तब सिर्फ किसान नहीं मरेगा, हर कोई मरेगा। और ऐसी स्थिति में GM food के साइड इफैक्ट जो हैं उस पे तो चर्चा का मतलब ही नहीं।

सरकार, कृषि मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद सभी को किसानों के पक्ष में काम करना चाहिए जबकि ये उसके विपरीत हो रहा है और उसके परिणाम भी किसानों की आत्महत्याओं के रूप में सामने आ रहे हैं।  सरकार से अपील है कि देश के अन्नदाताओं के कल्याण को ध्यान में रखते हुए जीएम फसलों पर एक बार पुनर्विचार करें।
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इराक ईरान युध्द 1980-88, एक अमेरिकी षडयंत्र

1980 के दशक में अमेरिका ने अपनी गिरती हुई अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए और पैसा कमाने के लिए एक ऐसा घृणित खूनी खेल खेला जिसके बारे में आज बहुत कम लोग जानते हैं। हम बात कर रहे हैं इराक ईरान युध्द की जो कि 1980 से 1988 तक चला तथा कुल 90 लाख लोगों के खून से इराक एवं ईरान की धरती रंग गई

बिना किसी बड़े कारण के ये दोनों देश लगभग एक दशक तक लड़ते रहे और इस युद्ध से अमेरिका तथा अन्य सहयोगी हथियार निर्यातक देश मोटी कमाई करते रहे और अन्त में यह युद्ध अनिर्णीत समाप्त हुआ। जानिए कैसे अमेरिका और उसके सहयोगियों ने इराक और ईरान के बीच युद्ध को भड़का कर खूनी खेल खेला और संय़ुक्त राष्ट्र स्वयं तब तक इसका मूकदर्शक जब तक कि दोनों देश दीवालिया नहीं हो गये। इसका परिणाम यह हुआ कि ये दोनों देश आतंकवाद, राजनीतिक अस्थिरता तथा कमजोर अार्थिक स्थिति का शिकार हैं। 

अमेरिकी अखबार द्वारा झूठी खबर से युद्ध की नींव डालना


1978 में अमेरिका के एक अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा की इराक ईरान की बॉर्डर पर जो की कंट्रोल लाइन है वहाँ काफी मात्रा में तेल का भंडार है। जब ये बात इराक़ और ईरान को पता लगी तो उनमे विवाद हो गया ये विवाद तनाव में बदल गया।

संयुक्त राष्ट्र प्रारम्भ में मूकदर्शक बना रहा


दोनों देश संयुक्त राष्ट्र पहुँच गए, और संयुक्त राष्ट्र में खुद अमेरिकी राजदूत ने उन्हें युध्द की सलाह दे डाली। उस समय इराक का राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन अमेरिका का खास दोस्त था। वही ईरान का झुकाव थोड़ा रूस की ओर था मगर रूस में आंतरिक तनाव शुरू हो गए थे रूस विदेश नीति पर फैसला लेने की स्थिति में नहीं था।

युद्ध का प्रारम्भ और अमेरिका की हथियार कम्पनियों का मोटा मुनाफा


ईरान को अकेला समझकर सद्दाम हुसैन ने युध्द छेड़ दिया, 10 सालो तक दोनों देश कुत्ते बिल्ली की तरह लड़े। दोनों एक ही संस्कृति, एक ही धर्म के देश है मगर कुल 90 लाख लोगो को मार डालाअमेरिका की आधी कंपनियो ने ईरान को और आधी कंपनियों ने इराक को हथियार बेचे।

मोटा मुनाफा कमाने के बाद अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र की युद्ध विराम की अपील


10 साल जब दोनों लड़ चुके थे और अमेरिका के हथियार बिक गए तो अमेरिका ने सुलह करवा दी, अमेरिका ने यह सुझाव दिया की वहाँ खुदाई करते है और जितना भी तेल निकलेगा उसे दोनों देश आधा आधा बाँट लेना। तो भाई ये बात आप 10 साल पहले भी बोल सकते थे तब तो अमेरिका ने ही युद्ध की सलाह दी थी।


अमेरिकी अखबार का दावा फर्जी निकला


अब खुदाई हुई तो रिपोर्ट आयी की वहाँ कोई तेल नही है इस बार दोनों ही देशो ने अपना सिर पटक लिया, जिस तेल के लिये 10 साल लड़े वो था ही नही। इराक ने वाशिंगटन पोस्ट के खिलाफ केस कर दिया मगर जुर्म तो अमेरिका में ही हुआ तो केस भी वही चला। अखबार ने माफ़ी मांग ली अदालत ने माफ़ कर दिया, मगर एक छोटी सी गलती ने 1 करोड़ लोगो का जीवन खत्म कर दिया।

युद्ध के बाद


यहीं से सद्दाम हुसैन अमेरिका के खिलाफ हो गया और बयानबाजी करने लगा (बाद में खाड़ी युद्ध भी अमेरिका ने ईराक पर फर्जी आरोप लगाकर ही किया), वहीं ईरान का भी विश्वास अब अमेरिका से उठ गया था। इसलिए ईरान ने एशिया की 3 महाशक्ति रूस, चीन और भारत से सम्बंध मजबूत किये मगर खाड़ी युद्ध में सद्दाम हुसैन की सरकार खत्म करने के बाद इराक आतंकवाद की राह पर निकल पड़ा।
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Friday, 7 October 2016

परमाणु हमला होने की स्थिति में क्या करें


पिछली पोस्ट में आपने पढ़ा कि परमाणु हमले पर कैसे नजर रखी जाए और कैसे बचाव के उपाय किए जायें. अब यदि आपके शहर पर परमाणु हमला हो जाय तो फिर जानिए आपको क्या करना चाहिए। परमाणु हमले की थोड़ी सी भनक लगते ही अपनी जान बचाने का संघर्ष शुरु कीजिए:


परमाणु तबाही के तीन भाग है,


1)शुरुवाती धमाका

2)फॉल आऊट

3)विनाशकारी तूफान



अगर परमाणु बम आपकि लोकेशन के ढेड मील के अंदर गिराया गया है, तो फौरन ईश्वर को याद कर लें और बैठे है तो खड़े हो जाए, अगले तीन सेकंड के अंदर अंदर आपका अस्तित्व भाप बनकर उड जाएगा, अगर परमाणु हमले से आपकी लोकेशन डेढ मील से दूर है तो आप बच सकते है, पहला धमाका सुनाई देने के बाद आपके पास ज़्यादा से ज़्यादा 5 सेकंड है, धमाके कि विरुद्ध दिशा मे किसी भी ठोस चीज़, दिवार या गहेरी जगह पोहंचें, ज़मीन पर उलटा लेट जाएं, अपने दोनो हाथ सिरपर रखते हुवे कानों को ढांपले और टांगें क्राॅस करलें, इसी के चलते आपको एक और ज़ोरदार धमाका सुनाई देगा जो पहेले धमाके से 100 गुनाह ज़्यादा ताकतवर होगा , और इस्से ज़मीन मे भुकंप जैसी स्थिति या ज़ोरदार कंपन पैदा होगा,

बधाई हो!

आप शुरुवाती धमाके से बच निकले,धमाका सुनाई देने के 2 से 3 सेकंड मे उठ खड़े हो और अपनी पनाह गाह (तलघर) की तरफ भागे,


फॉल आऊट

पहेले धमाके मे सैकड़ों इमारतें धुवां बनके उड़ जाएंगी जिनका मलब बारिश के समान बरसेगा, और साथ ही विस्फोट से भरे अल्फा पार्टिकल्स की बारिश भी शुरु हो जाएगी, धमाके कि तरफ हरगिज़ मुड के ना देखें, और फॉल आऊट मे गिरती चीज़ों से बचने कि कोशिश करें, अगर आप सही सलामत पनाह गाह तलघर बनकर तक पहुंच गयें तो बधाई हो!

आप फॉल आऊट से बच निकले, पनाह गाह के अंदर घुसते ही एक पल कि देर किये बिना अपने सारे कपडे़ उतार दें, क्योंकि फाल आऊट के दौरान यह बड़ी संख्या मे अल्फा पार्टीकल्स को चुस चुका होगा,

इसके बाद यदि आप ज़ख्मी है तो First Aid Kit (प्रथम उपचार) का उपयोग करें, और सही सलामत है तो तुंरत स्नान करें, ताकि फाल आऊट के बचे-खुचे असर से खुद को यथाशीघ्र बचा सके, अब ज़मीन पर हर तरफ विनाशकारी तूफान है, और आपको तलघर मे कई दिन रहना है,

याद रखें

1) कम से कम खाएं

2) जितना हो सके सो कर समय गुज़रे,

3) रेडियो सुनते रहे और बाहर कि स्तिथी से परिचित रहें,

4) अपनी हिम्मत कभी ना हारे,

5) अगले चंद दिन मे आप रेडियो एक्टोस्किंग्स के शिकार हो सकते है, जिसमे आपको तेज़ बुखार, घुटन , उल्टियां होसकती है, अब अपने पास मौजूद दवाइयों का उपयोग करें,

परमाणु धमाके के ज़्यादा से ज़्यादा 5 दिनों के बाद मदद कार्य और फौजी दस्ते आपके इलाके मे पहुंच जाएंगे।

रेडियो सुनते रहे, जब आपको पुर्ण विश्वास होजाए कि आपके इलाके मे मदद कार्य शुरु हो चुका है, तो बाहर निकल कर नज़दीकी मदतकर्ता दस्ते से तुरन्त संपर्क करें, ताकि आपको परमाणु विस्फोट कि चपेट मे आए हुए इलाके से फौरन बाहर निकाला जा सके।

यदि कोई मदतकर्ता दल आप तक ना पहुंच सकें, तो कम से कम 20 दिन बाद अपने तलघर से बाहर निकलें, अब तक विनाशकारी तूफान थम चुका होगा।

ज़िन्दगी की तरफ सफर

पनाह गाह से निकलते ही मुमकिन है कि आपको सबसे पहले अहसास यह होगा कि लाखों मे से सिर्फ आप ही ज़िन्दा बचे है, अब जिस भी प्रकार हो इलाका छोड दें और रेडियोएक्टिवीटी खत्म होने तक उस इलाके में वापस न आयें।



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परमाणु हमले के विनाश से कैसे बचें

परमाणु हमले के बाद कैसे बचा जाए:-
आज के दौर मे मनुष्य को जिस सबसे खौफनाक ,खतरनाक आफत का सामना करना पड़ सकता है वो है एक परमाणु -बम हमला, ज़रा सोचिए अगर आपके शहर पर परमाणु -बम गिरा दिया जाए, तो आप क्या करेंगे??? आप ज़िन्दा बच सक्ते है, मगर कैसे? ??
जानिये इस लेख में





परमाणु बम हमले का खतरा कहाँ है 
दुनिया मे इस समय 15,000 के आसपास परमाणु हथियार मौजूद है। जिन देशों मे परमाणु बम हमले का सबसे ज़्यादा खतरा है वो राष्ट्र यह हैं-

  1. दक्षिण कोरिया
  2. उत्तर कोरिया
  3. पाकिस्तान
  4. भारत
  5. इज़्राईल
  6. ईरान

इस्के अलावा रूस और अमरीका भी परमाणु बम का निशाना बन सकते हैं, देश की राजधानी, महत्वपूर्ण सैन्य छावनियाँ, बड़े शहर और ज़्यादा आबादी वाले इलाके परमाणु हमले का पहला निशाना होते हैं।

हालात पर नज़र रखे:- 
परमाणु हमला युद्ध मे हमेशा आखरी विकल्प होता है और अपने देश और विदेश के घटनाओं से हमेशा परिचित रहें... भारत पर मुख्य पाकिस्तान से परमाणु हमले का खतरा है तो भारत और पाकिस्तान के संबंधों पर कड़ी नजर रखें।



पनाह गाह (शरण लेने का स्थान या शेल्टर)


आप परमाणु हमले और उसके असरात से सिर्फ इस हालत मे ही बच सकते है, यदि आपके पास एक मज़बुत और सुरक्षित पनाह गाह मौजूद हो।

बेहतरीन पनाह गाह ज़मीन से कम से कम 10 फीट नीचे तलघर कि समान होगी, ज़मीन पर भी पनाह गाह बनाई जा सकती है, फिर भी वह होने वाली सारी बरबादी को नही रोक सकेगी, ज़मीन पर बनाई जाने वाली पनाह गाह इमारती पत्थरों से बनाई जानी चाहिए, यदि सामान्य ईंटें और काँक्रीट का उपयोग करना हो तो फिर ईंटों कि एक के बजाए चार परतें लगाई जाएं,

पनाहगाह में आवश्यक सामान 

अपने तलघर (पनाहगाह) मे हर समय इतना सामान स्टोर रखें जो 2 से 3 सप्ताह के लिये काफी हो,
आवश्यक सामान सूची

1) 1 एक टन पैक खाना जिसमें मांसाहार कि कोई वस्तु शामिल ना हो, बल्कि सब्जियां, फल हो ताकी food poisoning से ज़्यादा होने वाली मुसीबत से बचा जा सके,

2) डिस्टिल्ड या मिनरल वाटर कि बोतलें,

3) पानी का एक बडा टैंक जो नहाने के काम आएगा।

4) एक रेडियो (क्योंकि आपका स्मार्ट फोन,एवं मोबाइल परमाणु बम के पहेले झटके के बाद नाकारा और बेकार हो जाएगा) .

5) कपड़ों के एक्स्ट्रा जोड़े,

6) किताबें, जो कई दिन ज़मीन के नीचे आपको गुज़ारने मे आपकी साथी रहेगी।

7) First Aid किट

8) दवाइयां, जिनमें बुखार, सरदर्द, जिस्म दर्द की गोलियां, नींद की गोलियां भी क्योंकि आप उस परमाणु हमले के बाद ठीक से सो नही पाएंगे।

9) कई सारी बॅटरीज़ जो फुल चार्ज हो या फिर बिजली का किसी प्रकार का इंतेज़ाम और टार्च.

10) पोटॅशियम आयोडाइट कि गोलियां, (धमाके के पहेले दिन इस्तेमाल करें )

11) पेंसेलीन पोटाशियम ,पेन किल्लर ,सेफ्टिक अॅनटी सेप्टिक स्प्रे, यदि परमाणु हमला होजाए??

कैसे पहचानें परमाणु हमला हुआ है

किसी भी आपघात या हमले कि स्थिति मे ज़िन्दा बच जाने का पहला उसूल यह है कि अपने दिमाग को ठंडा रखे और अपने आपको काबू मे रखें, परमाणु हमला होने ले एक सेकंड के पश्चात आपको एक ज़ोरदार और भयानक धमाके कि आवाज़ सुनाई देगी, और फौरन प्याज़ कि शकल का एक कई मील उंचा धुवें का तुफान नज़र आएगा, फौरन समझ जाइये कि यह परमाणु हमला है,

आगे पढ़े परमाणु हमला होने की स्थिति में क्या करें

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Wednesday, 5 October 2016

ब्रह्मांड की ये तस्वीरें आपको कर देंगी हैरान..असाधारण अविश्वसनीय रूप से विस्तृत हैं हमारा ब्रह्मांड

हमारा ब्रह्मांड इतना विशाल और विस्तृत है कि हम उसका वर्णन शब्दों में नहीं कर सकते। नासा ने ब्रह्मांड को खंगालने के लिए अनेक मिशन जैसे वायेजर प्रोग्राम चलाये परन्तु आज तक हम ब्रह्मांड के एक बहुत छोटे से हिस्से से ही परिचित है परन्तु यह छोटा सा हिस्सा भी इतना विशाल है जिसकी कि हम कल्पना तक नहीं कर सकते।
 खगोल वैज्ञानिकों ने चीली के VISTA दूरबीन तथा हवाई द्विप की UKIRT दूरबीन के प्रयोग से संपूर्ण आकाश का अवरक्त किरणो मे एक असाधारण अविश्वसनीय रूप से विस्तृत मानचित्र बनाया है। यह मानचित्र अनेक छोटे-छोटे चित्रों को जोड़कर बनाया गया है। इन मानचित्रों को देखने के बाद आपको शायद आभास हो कि हमारा ब्रह्मांड कितना विस्तृत है। हालांकि इस मानचित्र में भी हमारी आकाशगंगा का एक बहुत छोटा सा भाग है और केवल 10% तारे हैं। 

ये है पहली तस्वीर , जरा सा जूम करके देखियेगा इसके सफेद वर्ग में आपको तारों का निर्माण क्षेत्र G305 है। यह क्षेत्र गैसा का एक महाविशालकाय भाग है तथा इसमें आपको दसियों हजार तारे नजर आयेंगे। आप इस क्षेत्र में नये तारों का निर्माण करते हुए धूल और गैस के झुण्डों को देख सकते हैं। नीले रंग के तारे सामान्यतया नवनिर्मित तारे होते हैं। 

ये नवनिर्मित दसियों हजारों तारों का क्षेत्र भी इस सर्वेक्षण का एक बहुत छोटा सा भाग है। आपने देखा कितना विस्तृत है यह लेकिन यह भी नीचे प्रदर्शित चित्र का एक छोटा सा भाग है (सफेद वर्ग में प्रदर्शित)



और यह चित्र भी नीचे दिये हुए चित्र का एक बहुत छोटा सा भाग ही है। अब नीचे दिया हुआ चित्र आप जूम करके देखिये। यह लोड होने में कुछ समय ले सकता है क्योंकि इसका आकार काफी बड़ा है ( 14 मेगापिक्सल से कुछ अधिक)

अगर आप इसे जूम करके नहीं देखेंगे तो यह चित्र आपको कुछ खास नहीं लगेगा किन्तु वास्तव में यह अत्यधिक विशाल चित्र है। (19650 गुणे 1875 पिक्सल)  इसे वास्तविक चित्र को बहुत छोटा करके बनाया गया है। 

यदि इस चित्र को वास्तविक चित्र को बहुत छोटा कर बनाया गया है! तो वास्तविक चित्र के आंकड़े कितने विशाल है ? ज्यादा नही केवल 150 अरब पिक्सेल. चौंक गये क्या? 

अगर आप इस चित्र को पूरी तरह से जूम करके देखना चाहते हैं तो आपको इस लिंक पर जाना होगा। यहां पर आप इस चित्र के हर हिस्से को जूम करके विस्तार से देख सकते हैं । इस चित्र में एक अरब से ज्यादा तारे हैं तथा यह ब्रह्मांड का अब तक का सबसे व्यापक चित्र है। यह मानचित्र भीअनेक छोटे-छोटे चित्रों को जोड़कर बनाया गया है। इस चित्र में हमारी आकाशगंगा के केवल 1 प्रतिशत भाग का समावेश है और ब्रह्मांड में तो हजारों आकाशगंगायें हैं .. जरा सोचिये कितनी बडी होगी हमारी पूरी आकाशगंगा और फिर कितना बड़ा होगा हमारा ब्रह्मांड.

इस लिंक पर क्लिक कीजिये और विस्तार से आनन्द लीजिए हमारे ब्रह्मांड की विशालता का.. और हां लिंक देखने के बाद कमेन्ट करना मत भूलियेगा और अगर आपको हमारा यह लेख पसन्द आये तो हमारी इस वेबसाइट को सब्सक्राइब अवश्य कीजियेगा। धन्यवाद्




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Tuesday, 4 October 2016

मानव जाति महान उपलब्धि - वायेजर (Voyager) 1 के बारे में कुछ आश्चर्यजनक तथ्य

नासा का भेजा हुआ Voyager 1 (वायेजर प्रथम) अन्तरिक्ष यान मानव जाति द्वारा भेजा हुआ ऐसा पहला यान (Deep Space Probe) हैं जो हमारे सौरमंडल को पार करके सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से बाहर INTERSTELLAR space यानी अन्तरतारकीय अन्तरिक्ष में पहुंचा है. अगर हमे ब्रह्माण्ड में किसी और जगह जीवन ढूँढना हैं तो INTERSTELLAR प्रवास करना अति आवश्यक हैं. इसे सितम्बर 5, 1977 को टाइटन 3ई रॉकेट द्वारा बाह्य सौरमंडल के अध्ययन के उद्देश्य से नासा द्वारा अंतरिक्ष में भेजा गया। यह नासा का सबसे लम्बा मिशन है।


Voyager 1 नासा के डीप स्पेस एक्सप्लोरेशन प्रोग्राम का एक हिस्सा है। समय इस मिशन को लगभग 39 साल और एक महीना हो चुका है और यह स्पेस प्रोब आज भी काम कर रहा है और हमारे सामने सौरमंडल के अनेक अन्जान रहस्य हर पल भेज रहा है। यह मानव निर्मित पहली वस्तु है जो सौरमंडल के बाहर तक जा चुकी है और पृथ्वी से सर्वाधिक दूर है। वायेजर 1 से आने वाले संकेत जो प्रकाश गति से यात्रा करते हैं पृथ्वी तक पहुंचने में 13.8 घंटे ले रहे हैं। इसकी यह अनन्त यात्रा निरन्तर जारी है।



मानव जाति की कुछ महान उपलब्धियों में से एक, इस वायेजर मिशन के बारे में आज हम आपके सामने कुछ आश्चर्यजनक तथा रोमांचक तथ्य लेकर प्रस्तुत हैं -


1. Voyager 1 प्रतिदिन लगभग 10 लाख मील की दूरी तय करता है. इस गति पर अंतरिक्ष में अपने को सुरक्षित रखने के लिए इसे बहुत सी विशेषताओं की आवश्यकता होती है. वायेजर 1 को किसी खतरे का आभास होने पर कुछ सेकण्डों के भीतर अपने आप को स्वयं प्रोग्राम कर सकता है. इसकी इस विशेषता की इसे मानव इतिहास का सबसे लम्बा मिशन बनाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है, 1977 में इस तकनीक को बनाने में नासा को खासी मेहनत करनी पड़ी थी क्योंकि उस समय कम्पयूटिंग इतनी विकसित नहीं थी।

2. वायेजर 1 लगभग 65000 हिस्सों को मिलाकर बनाया गया है। ये हिस्से भी अत्यंत छोटे-छोटे बहुत से पार्टस् को मिलाकर बनाये गये हैं। उदाहरण के लिए वायेजर की कम्पयूटर मेमोरी में लगभग एक मिलियन इलेक्ट्रानिक पार्टस् हैं। सोचिये इतने ज्यादा हिस्सों को एक साथ एसेम्बल करना कितना बड़ा काम है।

3. इसकी अन्य विशेषताओं में प्रमुख है इसका कैमरा। इसका कैमरा इतना साफ, स्पष्ट और क्षमता युक्त है कि यह आधी मील की दूरी से किसी मैगजीन को स्पष्टतया पढ़ सकता है। 1977 के समय इस क्षमता का डिजिटल कैमरा होना आम बात नहीं थी। उस समय यह किसी चमत्कार जैसा था। ऐसे ही चमत्कारों के कारण यह यान आज भी काम कर रहा है।

4. दानव ग्रहों ब्रहस्पति और शनि एवं गैस ग्रहों अरुण तथा वरुण का अध्ययन।  वायेजर 1 तथा वायेजर 2 की सहायता से दानव ग्रहों यानी बृहस्पति और शनि एवं गैस ग्रहों यानी अरुण तथा वरुण तथा उनके चन्द्रमाओं का अध्ययन करना सम्भव हुआ। इन यानों ने ग्रहों के असामान्य चुम्बकीय क्षेत्रों की भी जानकारी हमें दी।

5. पृथ्वी से अरबों मील की दूरी। वायेजर 1 पृथ्वी से लगभल 13 अरब मील की दूरी पर है और निरन्तर दूर शान्त अन्तरिक्ष में चला जा रहा है। हर सेकेंड के साथ इसकी गति और बढ़ जाती है और यह और दूर होता जाता है। 13 अरब मील .. जरा सोचिये कितनी दूरी होगी...

6. गोल्ड रिकार्ड डिस्क। वायेजर 1 अपने साथ एक स्वर्ण डिस्क ले गया है जिसमें कि मानव जाति के बारे में जानकारी, अमेरिका के राष्ट्रपति का भाषण, बच्चे के रोने की आवाज कई तरह के संगीत जिसमें की भारतीय संगीत भी शामिल है। इस गोल्ड डिस्क का प्रयोजन ये था कि यदि यह किसी उन्नत सभ्यता वाले परग्रही जीव को मिले तो उसे यह पता चले कि यह पृथ्वी से मानव जाति द्वारा भेजा गया यान है और उसे मानवों के बारे में जानकारी मिल सके।

7. सबसे तीव्रगामी मानव निर्मित वस्तु। जी हाँ, वायेजर प्रथम मानव निर्मित सबसे तेज चलने वाली वस्तु है। यह 38000 मील प्रति घंटे से थोड़ी अधिक गति से चल रहा है। हालांकि इतनी अधिक गति से चलने के बाद भी यह 38 साल में केवल सौलमंडल के बाहर ही निकल सका है।

8. अंतरतारकीय अंतरिक्ष में पहुंचने वाली प्रथम मानव निर्मित वस्तु। वायेजर प्रथम सौरमंडल के बाहर निकलकर अंतरतारकीय अंतरिक्ष में पहुंचने वाली प्रथम मानव निर्मित वस्तु है। यह पृथ्वी से दूरस्थ अंतरिक्ष यान है।

9. सबसे लम्बा अंतरिक्ष मिशन। वायेजर 1 किसी भी देश दवारा चलाया गया सबसे लम्बा स्पेस मिशन है। 1977 में शुरु हुआ यह मिशन अभी तक बिना किसी रुकावट के काम कर रहा है और इसके 2025 तक सक्रिय रहने का अनुमान है।

10. बृहस्पति के चंद्रमा पर ज्वालामुखीय घटनाओं की खोज। बृहस्पति के चंद्रमा Io पर वायेजर 1 द्वारा ज्वालामुखीय गतिविधियां देखी गईं। वैज्ञानिकों के लिए एक चौंका देने वाली जानकारी थी जो वायेजर 1 से मिली थी। यह पृथ्वी के अतिरिक्त सौरमंडल में स्थित किसी अन्य पिण्ड पर देखी गई पहली ज्वालामुखीय घटना थी। 
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Monday, 3 October 2016

ज्ञानवाणी में आपका स्वागत है.. Welcome to GyanVani

नमस्कार दोस्तों,
मैं हूं विराट त्रिपाठी और आपके लिए ज्ञान के प्रसार के एक प्रयास के रुप में यह ज्ञानवाणी ब्लाँग लेकर आपके सामने हूं। मेरे मन में काफी समय से यह विचार था कि एक ब्लाग बनाया जाए जिसमें कि विज्ञान, सम-सामयिक घटनाओं, खगोलिकी, पर्यावरण, पारिस्थितिकी तथा अन्य विषयों से सम्बन्धित ज्ञान को निःशुल्क और हिन्दी माध्यम से आगे वितरित किया जाए। यह साइट ज्ञानवाणी उसी दिशा में एक कदम है। प्रारम्भ में ज्ञानवाणी को हिन्दी भाषा की एक साइट जिसे "सब-कुछ किन्तु हिन्दी में" के रुप में बनाया गया है। ज्ञानवाणी का मुख्य उद्देश्य इसके शाब्दिक अर्थ के अनुसार हिन्दी माध्यम में ज्ञान को इण्टरनेट के द्वारा जन-जन तक पहुंचाना है।


  यहां पर आपको नयी-नयी जानकारियां, जो शायद आपकी सोच से भी परे हों, आपको हिन्दी में मिलेंगी  और इसकी सफलता के लिए आप सब का सहयोग अपेक्षित है।

इस साइट को बनाने में मेरा खुद का परिश्रम तो है ही, साथ ही साथ मेरे मित्रों और साथियों के सुझावों की भी बहुत बड़ी भूमिका रही है। आप लोगों के सुझाव, शिकायतें तथा सहयोग इस साइट को नई उंचाइयां प्रदान करेंगी तथा हमारे उत्साहवर्धन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगीं।

धन्यवाद्


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