किसको क्रेडिट दें ब्रेग्जिट को या भारत की आर्थिक नीति को जिसने भारत की अर्थव्यवस्था को ब्रिटेन से आगे कर दिया ।


150 साल बाद ऐसा हुआ है कि भारत की अर्थव्यवस्था ने ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ा है ।
भारत विश्व का दूसरी सबसे बड़ी जनसँख्या वाला देश है परन्तु टैक्स सिर्फ तीन प्रतिशत लोग ही देते हैं
उसके बाद भी जिस तेजी से भारत की जी डी पी बढ़ रही है वो अपने आप में एक मिसाल है
फरवरी 2016 में ही भारत ने चीन को पीछे छोड़ा था.......अब ब्रिटेन को
जीडीपी के आधार पर विश्व का छठा सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन गया है
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का अनुमान भी है कि 2017 में भारत की जीडीपी 7.6 प्रतिशत तक हो जाएगी
पर सरकार का निश्चय इसे डबल डिजिट में पहुँचाने का है ।
मनमोहन सिंह तो बोल गए कि जीडीपी दो प्रतिशत कम हो जाएगी पर उनकी सुनता कौन है इसलिए जीडीपी कुछ समय के लिए आधा से पौन प्रतिशत तक डाउन होगा
फिर भी मुद्रास्फीति को कम रखने और ग्लोबल कमोडिटीज की कीमत में मंदी ने भारत की राह आसान कर दी है
मोदी सरकार ने आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने के लिए व्यापक बाजार सुधारों को प्रेरित किया
उधर ब्रिटेन ब्रेग्जिट से निकल गया और उसकी इकॉनोमी एवं करेंसी दोनों संकट से जूझने लगे
आने वाले सालों में फ्राँस और जर्मनी को भी भारत पीछे छोड़ ही देगा बस एक बार और मोदी जी की सरकार बन जाए
काँग्रेस तो चाय भी उधार का पीती है......उससे क्या उम्मीद करना .........मुम्बई में काँग्रेस मुख्यालय के पीछे एक चायवाला है बेचारे को मोदी की बिरादरी का समझ कर दो लाख की चाय पी गए पर पैसे नहीं दिए ।
ऐसे लोग विदेशों से कर्ज ही लेंगे देश को मजबूत तो नहीं ही बनाएंगे
वेंकैया नायडू ने भी आज बोल दिया है 2017 का कैलेंडर जारी करके " मेरा देश बदल रहा है,आगे बढ़ रहा है "
बात तो सही है बढा नहीं तो ब्रिटेन को पीछे छोड़ा कैसे ??


By : Ajita Anuja

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