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When the bugle calls; They shall rise and march again.

Wednesday, 7 December 2016

क्या मोदी सरकार की नोटबंदी विफल रही?

14 लाख करोड़ के नकदी अर्थव्यवस्था में 11 लाख करोड़ बैंक खातों में आ चुके हैं, अनुमान है कि आगे भी और आ जाएंगे| तो इससे क्या निष्कर्ष निकालें- नोट बंदी विफल रहा ?
22 करोड़ अकेले जनधन अकाउंट हैं, 2.5 लाख के हिसाब से अकेला यही 55 लाख करोड़ खपाने में सक्षम हैं, यानि 14 लाख करोड़ का भी 4 गुना , उसमें महिलाओं का बैंक अकाउंट अलग है| यानि ऐसे देश में जहाँ हर घर में भगत सिंह जन्मे लेकिन मेरा घर छोड़ के टाइप वाला देशप्रेम हो ,तो यहाँ ऐसा होना एबनॉर्मल नहीं है|


RBI के observe, orient, decide, and act (OODA) की नीति से स्पष्ट हो चुका है कि असल प्लानिंग तो अब शुरू हुई है| उसके पहले कि सबसे बड़ी प्लानिंग यही दिखाई पड़ती है कि कोई प्लानिंग नहीं !
पहले भले असंभव रहा हो लेकिन अब के आकड़े ये बता सकते हैं कि कितना नोट छापना है, कितना कैशलेश होना है| जैसे रोज रोज नए नियम आ रहे हैं, कल RBI गाइडलाइन जारी कर डालेगी कि बस इससे ज्यादा नोट मार्केट में नहीं आने हैं , बाकी के जमा राशि का इस्तेमाल केवल और केवल प्लास्टिक मनी या चेक आदि के द्वारा ही संभव है तोदूसरे के अकाउंट का इस्तेमाल करके काले को सफ़ेद करने के अरमानों पे फिर पानी फिर जाएगा|
जनधन वालों कि धन निकासी की सीमा 10 हजार प्रतिमाह कर दी गयी, 2 साल लगेंगे 2.5 लाख निकालने में| जनधन अकाउंट के माध्यम से काले को सफ़ेद करने वालों के अरमानों पे पानी फिर चुका है| अब उन्हे बड़ा धैर्य रखना होगा और अब तो मुखबिरी द्वारा उनके पकड़े जाने की संभावना भी बहुत बढ़ गयी है और पकड़े जा रहे हैं|
तीसरी बात ,अब देखना ये है कि 30 दिसंबर तक अकाउंट में कुल कितना जमा होता है| लग तो ऐसा ही रहा है कि 14 लाख करोड़ से भी ज्यादा जमा हो जाएंगे यानि जाली नोटों की अर्थव्यवस्था का प्रभाव भी साक्षात दिख सकता है , ये पुनः RBI को दूसरे कड़े कदम उठाने के लिए आधार प्रदान करेगा|
चौथी बात कि नोट बंदी के बाद सरकार को ये पता चल चुका है कि देश में वास्तव में कितने अमीर, कितने मध्यम और कितने गरीब हैं| टैक्स बेस बढ़ाने में ये मिल का पत्थर साबित होगी| GST आने वाला है| 124 करोड़ के देश में एक झटके में टैक्स बेस को इतने कम समय में इस स्तर तक ले जाने में ये बड़ी सफलता होगी|
और आखिरी सबसे बड़ी बात कि जब तक ये सारे नोट बैंकों में हैं ,तब तक उसपर RBI का पूर्ण नियंत्रण है और ये भी निश्चित है कि कोई कितनी भी चालाकी लगा ले ,RBI और इन्कम टैक्स विभाग कालधन वसूल कर लेगी, चाहे जैसे ....चाहे न बदले जा सकने वाले नोटो के फॉर्म में या फिर अतिरिक्त कर और पेनाल्टी के फॉर्म मे| आप डाल डाल चलोगे , वो पात पात चलेंगे, आप हथकंडे बदलोगे , वो नियम बदलेंगे| और वही चल रहा है|
कुछ भी हो जाये, जहाँ 87% करेंसी को demonetise किया गया हो, वो भी डिजिटाईजेशन के युग में ,तो विफलता का कोई कारण नहीं दीखता, सफलता निश्चित है।

मूल लेखक :  Ashwini Kumar Verma

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति ज्ञानवाणी (www.gyanvani.in) उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार के लिए ज्ञानवाणी किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.

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