कठुआ पर तो खूब चीखे पर मंदसौर पे चुप रहना, वाह रे लिबरल तेरा क्या कहना!

कठुआ पर तो खूब चीखे पर मंदसौर पे चुप रहना, वाह रे लिबरल तेरा क्या कहना!

मैं अभी उनलोगों के वाल देख रहा हूँ जो आसिफा के समय मर्माहत थे, मर्माहत थे मने बहुत ज्यादा ही मर्माहत थे। तीन महीने पुराने केस को एक अलग एंगल से उठाना और उसमें हिन्दू, मन्दिर जोड़ना। फिर अगले ही दिन पूरा बॉलीवुड से होते हुए विदेशों तक पहुंच जाना। कश्मीर से कन्याकुमारी तक ये दावानल की तरह फैल जाना। टीशर्ट्स तक बन के विदेश चले जाना। हमारे राँची जैसे शहर में तो एक नहीं दो-दो दिन कैंडल/सैंडल मार्च निकाले गए। और इसमें भयंकर शेखुलर हिन्दू,जोल्हा और हलेलुइया थे बल्कि हलेलुइया कुछ ज्यादे ही थे। मैं इस बीच मुम्बई गया तो हर स्टेशन जस्टिस फ़ॉर आसिफा के बैनर से पटा हुआ था। इतनी संजीदगी देख के तो हैरान था मैं। एक आसिफा के लिए पूरा देश खड़ा है? वाह! अब यहां पूरा देश नहीं बल्कि देश तोड़क शक्तियां जो इन जैसों मामलों में गिद्ध जैसे टूट पड़ते हैं और एक साथ पूरे देश मे एक्टिव हो जाते हैं खड़े थे। ये जोल्हे,हलेलुइया और लालची शेखुलर हिन्दू होते हैं जो विदेशी टुकड़ो पे पलते हैं और जब से टुकड़े जरा कम आने शुरू हुए हैं तब से भौंके जा रहे हैं। मैं यहां धर्म ले के आ गया, बिल्कुल ले के आ गया और आगे भी लाऊँगा क्योंकि तुम्हारी दोगलई अब जरूरत से ज्यादा बास मार रही है।कठुआ मामले में जब हम सवाल खड़े कर रहे थे तो हमें इंसानियत का दुश्मन करार दे रहे थे ये, इंसानियत बिल्कुल ही मर चुकी थी हममें।और इनमें तो कूट कूट के इंसानियत भरी हुई थी/है जो बिना जात, धर्म देखे ही विह्वल हो उठता है। हालांकि उसे मंदिर पुजारी से जोड़ने में कोई कोताही नहीं बरतते हैं,जरा सा भी देरी नहीं करते हैं।
ये इंसानियत के रखवाले हैवानियत के प्रति सेलेक्टिव होते हैं। और हैवानियत वो जो शेखुलर राजनीति को खाद प्रदान करती हो।
अभी ये इंसानियत के संवर्धनकर्ता मूसा के भूर में घुस के धान की बाली कुतर रहे हैं।
बिना जात धर्म के विह्वल होने वाले ये मूसा की औलादें मंदसौर की बच्ची के लिए कुछ बचा के रखे नहीं है। आंखों से लोर सुख गए हैं, बैनर वाले भाग गए हैं, कैंडल खरीदने तक की औकात न रह गई है इन सब की क्योंकि सब आसिफा के टाइम ही खत्म कर दिए थे, अब कोई दूसरी आसिफा आएगी तो फिर सैलाब फुट पड़ेगा।
मंदसौर की बच्ची भी कोई बच्ची है ? हैं? इन्हें तो बस मर जाना ही चाहिए।
बॉलीवुड की कैरियर के रसातल में पहुँच चुकी नचनियों को कोई तख्ती बना के दे नहीं रहा है क्या ?? या इतने भी पैसे नहीं है तुम्हारे पास ? दरिंदगी से दहल जाने वाली नचनियों क्या तुम्हारा दहलना केवल कैरियर और पैसा कमाने भर ही है ?? अच्छा! मंदसौर की बच्ची की खबर नहीं पहुँची न आप सबों को ?? बड़के शेखुलर चैनल जो तुम बहुत ही हलकट समय में गाउन पहन के देखती हो वहाँ इस बच्ची की खबर नहीं आई न ? अगर आई रहती तो जरूर लगाती न ? है न ? .. और ट्विटर पे जिसको आप फॉलो करती है वो इस न्यूज को अपडेट नहीं किये न ? नहीं तो छाती जरूर फटता आपका ,है न??
मंदसौर की बच्ची के लिए किसी के पास टाइम नहीं है, सब अपने-अपने काम में मशगूल है, यहां हैवानियत कैरियर में विलीन हो गई है।
हरामजादों कुछ तो शर्म करो।
इंसानियत के ठेकेदारों थूं है सालों तेरे ऊपर।
संघी गंगवा
खोपोली से।

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